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Wednesday, October 11, 2017

How to be a Wellness Coach आत्म-कल्याण गुरु कैसे बनें?

तनाव भगाएं
धन बढ़ाएं
एक आसान तकनीक से
RESEARCH: DR. ANWER JAMAL
D.N.Y.S.
विशेष     
       इस पुस्तिका के कॉपीराईट सुरक्षित नहीं हैं। इसे कल्याण के संकल्प और फ़लाह की नीयत से ही लिखा गया है और इसका कॉपीराईट सुरक्षित नहीं रखा गया है। हरेक भाषा के हरेक व्यक्ति को अनुमति है कि वह इसे बिना काट छाँट किए किसी भी भाषा में अनूदित करके बाँट सकता है।

आभार
       जो अच्छे लोग अच्छी नीयत से कोई धार्मिक संस्था चला रहे हैं और वे अपने कार्यकर्ताओं के शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं। हम उनके बहुत आभारी हैं।

इस पुस्तिका की ख़ास बात क्या है?
सबसे ख़ास बात यह है कि
·         पंच तन-मन कर्म तकनीक आसान है
·         यह लगभग FREE है
·         इसे सब कर सकते हैं
·         यह तुरन्त रिज़ल्ट देती है


इस पुस्तिका से क्या लाभ मिलते हैं?
·         आपके मन को शाँति मिलती है
·         आपकी दौलत बढ़ती है
·         आय के नए साधनों पर ध्यान जाता है
·         हमेशा हाथ में अपने कामों को करने लायक़ माल मौजूद रहता है
·         बच्चे बीमारियों से बचते हैं
·         सन्तान पूर्ण आयु तक जीवित रहती है
·         इम्यून सिस्टम बेहतर होता है
·         पति पत्नी में प्रेम बढ़ता है
·         परिवार के सदस्यों में एकता और सहयोग बढ़ता है
·         सकारात्मक ऊर्जा का बहाव सन्तुलन में आने लगता है
·         बीमारियाँ, हादसे और अकाल मृत्यु के अवसर कम हो जाते हैं
...क्योंकि आप प्रकृति के आरोग्य विधान (शिफ़ा के निज़ाम, healing System) को जान लेते हैं।
  

सब्जेक्टः यह पुस्तिका एक अनोखे विषय पर लिखी गई है। विषय है धर्म प्रचारकों का शोषण। आपने मज़दूरों, किसानों, औरतों, बच्चों और कर्मचारियों के शोषण पर बातें की होंगी। आपने उनके लिए होने वाले आन्दोलन भी देखे होंगे। आपने उनसे सहानुभूति भी जतायी होगी। ...लेकिन आपने धर्म प्रचारकों के शोषण पर कभी बात न की होगी। आपने कभी उन्हें हड़ताल या कोई माँग करते न देखा होगा। यह एक ट्रेज्डी है। उनका शोषण कोई दूसरा नहीं करता बल्कि वही संस्थाएं करती हैं, जिनके लिए वे अपने तन-मन-धन से समर्पित होकर काम करते हैं। भारत एक धर्म प्रधान देश है। करोड़ों लोग किसी न किसी संस्था से जुड़कर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जहाँ उनका शोषण किया जाता है। उनका शोषण किसी के लिए चिन्ता का विषय नहीं है। पहली बार उनके शोषण के कारण और निवारण के लिए ही कोई पुस्तिका लिखी गई है।   
आम तौर पर धर्म प्रचारकों की आय, सेहत और शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए कोई सामूहिक प्रयास नहीं किया जाता। यह किसी एक धर्म-मत के प्रचारकों की बात नहीं है बल्कि सभी धर्म-मत की संस्थाओं का हाल एक जैसा है। पहली बार हम एक ऐसी तकनीक सबके हितार्थ दे रहे हैं, जिसे हमने लम्बे समय तक गहन शोध करके विकसित किया है। जो बिल्कुल पन्थ निरपेक्ष है। जिसे हरेक धर्म-मत का अनुयायी कर सकता है।

तनाव दूर करने का सबसे आसान उपाय
DR. ANWER JAMAL
D.N.Y.S.
                दोस्तो। आज हम धर्म-प्रेमियों और दावती भाईयों के मानसिक तनाव को दूर करने के विषय में ज्ञान के कुछ अनमोल मोती आप सबको भेंट करेंगे। ये वे मोती हैं, जिन्हें वेद, क़ुरआन, बाइबिल, गुरू ग्रन्थ साहिब, सूफ़ी दर्शन और योग दर्शन से लेकर आधुनिक मनोविज्ञान की महान खोजों की 30 साल से ज़्यादा स्टडी करके पाया गया है।
समाज के लोग किसी  बाबा के पास कल्याण की आशा में जाते हैं। वे सोचते हैं कि उनके आशीर्वाद से उनके अटके हुए काम बन जाएंगे। रोज़गार मिल जाएगा, आय बढ़ जाएगी, शादी हो जाएगी, बीमारी दूर हो जाएगी या मन को शाँति मिल जाएगी।आदि आदि।
                इस छोटी सी सारगर्भित पुस्तिका के ज़रिये हमने आपको उपरोक्त सभी समस्याओं का हल दे दिया है। इस किताब के ज्ञान से आप बीमारियों की जड़ ‘तनाव’ पर ही प्रहार करते हैं। आप प्रकृति के आरोग्य विधान से काम लेकर ख़ुद को  स्वस्थ रख सकते हैं। अपनी ज़रूरत का धन कमा सकते हैं. अपनी बिगड़ी बना सकते हैं क्योंकि सबका मालिक एक है. सबके कल्याण के लिए उसका नियम भी समान है.
प्रकृति का अटल नियम क्या है?
                हर इन्सान कल्याण यानि फ़लाह चाहता है। कल्याण या फ़लाह कुछ निश्चित नियमों पर आधारित है। ये प्राकृतिक नियम हैं, जो शाश्वत हैं। आप इन्हें हरेक धर्म-मत में देख सकते हैं। जैसे कि जैसा बोना, वैसा काटना।
                आज आप जैसे विचारों को अपने मन में रोप रहे हैं, आने वाले समय में उसी के अनुरूप आपके अन्दर भावनाएं उठेंगी और फिर आप उन भावनाओं के अनुरूप ख़ुद ही कर्म करेंगे। फिर उन कर्मों का फल यानि परिणाम अवश्य ही सामने आएगा, जिसे आपको ही भोगना होगा। यह एक निश्चित नियम है।
                भारत, ईरान, अरब और अमेरिका व जापान, पूर्व और पश्चिम के हर देश में यह नियम समान रूप से लागू है। आप नफ़रत के विचार रखेंगे तो मन में नफ़रत की भावना उठेगी। जिससे लड़ाई-झगड़े होंगे। व्यक्ति, परिवार, समाज और देश व राष्ट्र को महान हानि होगी।
                इसके विपरीत प्रेम के विचार से मन में प्रेम की भावना उठेगी। जिससे परोपकार और सेवा के कार्य की प्रेरणा होगी। जिसका फल समाज में सुख-शाँति और समृद्धि बढ़ने के रूप में सामने आएगा। नफ़रत के बीज बोकर प्रेम के फल पाना ऐसे ही असम्भव है, जैसे कि बबूल बोकर आम का फल पाना। यह प्रकृति का अटल नियम है।

धर्म प्रचारक तनावग्रस्त क्यों रहता है?
                जैसा बोना, वैसा काटना; इस नियम का पालन करने से कल्याण निश्चित ही होता है। ऐसे प्राकृति नियमों के ज्ञान के प्रचार को धर्म प्रचार या तब्लीग़े दीन कहते हैं। इस काम में लाखों बहन भाई लगे हुए हैं। ये सभी आम आदमी होते हैं, जो समाज के सामान्य सदस्य होते हैं। आम आदमी की तरह इन्हें भी सुख दुख होता है बल्कि इन्हें दूसरों के मुक़ाबले सुख-दुख थोड़ा ज़्यादा ही होता है। इसकी वजह यह होती है कि जब आम लोग केवल अपने आप में मगन होते हैं, तब ये दूसरों के सुख दुख को अपना मानते हैं। दूसरों को सुखी देखकर ये ख़ुश होते हैं और दूसरों के दुख को देखकर ये दुखी होते हैं। इस स्वभाव की वजह से ये अक्सर तनाव का शिकार रहते हैं। ये समाज में अपराध, नशा और अनैतिक काम देखकर अपने मन में बेचैन रहते हैं। इसके अलावा दूसरे लोगों को जिन कारणों से तनाव रहता है, उन्हीं कारणों से इन्हें भी तनाव रहता है।

धर्म प्रचारकों का शोषण
                धर्म प्रचारकों का शोषण चर्चा का विषय नहीं बनता। उनकी समस्याओं के समाधान का कोई सामूहिक प्रयास नहीं किया जाता। विभिन्न संस्थाएं इन लोगों से अपने मत-प्रचार का काम तो लेती हैं लेकिन इन्हें कोई वेतन या पारिश्रमिक नहीं दिया जाता। इन लोगों से संस्थाएं दान लेती हैं लेकिन उस आमदनी में से संस्था इन्हें कोई हिस्सा नहीं देती। ज़्यादातर वह आमदनी संस्था के प्रमुख की ऐश में ख़र्च होता है। कुछ जगहों पर संस्था के नाम से बैंक में जमा पड़ा रहता है।
                इनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान नहीं रखा जाता। साल में एक बार भी इनका मानसिक चेक अप नहीं किया जाता। पूरे जीवन में एक बार भी इनका मानसिक चेक अप नहीं किया जाता। इसी वजह से कई बार आप देखते हैं कि धार्मिक संस्थाओं के कार्यकर्ता नफ़रत का शिकार हो जाते हैं और वे प्रेम के बजाय नफ़रत का सन्देश देने लगते हैं। अगस्त 2017 में हरियाणा में डेरा सच्चा सौदा के बाबा गुरमीत की गिरफ़्तारी के विरोध में उनके अनुयायियों द्वारा किया गया हिंसक उत्पात इसकी एक ताज़ा मिसाल है। जिसमें 30 लोग मारे गए और सैकड़ों नर नारी घायल हुए। तनावग्रस्त होकर इस तरह के उत्पात बहुत से धर्म-मत के प्रचारकों द्वारा समय समय पर किये गये हैं।

95 प्रतिशत बीमारियों का कारण है तनाव
                तनाव अपने आप में बहुत कष्ट देने वाली हालत है। इसी के साथ आधुनिक रिसर्च से यह सामने आया है कि 95 प्रतिशत बीमारियों का असली कारण तनाव है। तनाव में नर्वस सिस्टम के काम करने का तरीक़ा बदल जाता है। जिससे बॉडी सेल्स को ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिलता। उनका कचरा बाहर नहीं निकलता। शरीर शुद्ध नहीं होता और शरीर के अंगों में सड़न शुरू हो जाती है। जिससे बीमारियों के कीटाणु पैदा होते हैं। इस तरह कई बीमारियाँ इन्सान में पनपती हैं।

मेंटल हेल्थ सर्वे: यूपी के 20 लाख युवा डिप्रेशन के शिकार,ये है वजह



बड़े-बड़े सपने लेकर जिंदगी की शुरुआत करने वाले युवा जब हकीकत की बेरहम जमीन पर खुद को असुरक्षित महसूस करता है तो उसके अंदर हताशा घर करने लगती है। हताशा की ऐसी ही कई स्वनिर्मित वजहों के चलते प्रदेश में बड़ी संख्या में युवा हताशा की प्रवृत्ति का शिकार हो रहे हैं। यह हताशा उन्हें नशे की लत में धकेलने से लेकर जिंदगी से मोहभंग तक खींच ले जा रही है। उत्तर प्रदेश स्टेट मेंटल हेल्थ सर्वे रिपोर्ट में ऐसा ही एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सैंपल सर्वे के आधार पर तैयार रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश के 20 लाख से ज्यादा कामकाजी युवाओं में जिंदगी जीने का हौसला घट गया है। यह संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। 
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में आयोजित तीन दिवसीय भारतीय साइकियाट्रिक सोसाइटी सेंट्रल जोन के वार्षिक अधिवेशन में इस रिपोर्ट पर चर्चा की गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि प्रदेश के 1.95 करोड़ लोग किसी न किसी तरह की मानसिक बीमारी का शिकार हैं। इस संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है।

यहां बताया गया कि सर्वे रिपोर्ट उत्तर प्रदेश मेंटल हेल्थ अथॉरिटी को सौंप दी गई है। यह रिपोर्ट प्रदेश के कुछ जिलों में सैम्पल सर्वे के आधार पर तैयार की गई है। संगठन के सेंट्रल जोन के नवनियुक्त चेयरमैन डॉ. रवि कुमार के मुताबिक रिपोर्ट भयावह स्थित दर्शाती है। ओपीडी में आने वाले लगभग 95 फीसदी मरीज डिप्रेशन के किसी न किसी स्टेज में हैं। यह समस्या शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बढ़ रही है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में कुछ अधिक है। युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी, किसी न किसी तरह के नशे की प्रवृति के चलते डिप्रेशन के साथ ही मूड डिसआर्डर जैसी गम्भीर बीमारियां बढ़ा रही हैं। 
हताशा के पांच कारण
-अपेक्षा के अनुरूप नौकरी या काम न मिलना
-काबिलियत के अनुसार वेतन न मिलना
-निजी और सरकारी दोनों में ही असुरक्षा की भावना
-जरा-सी विपरीत स्थिति में नशे की गिरफ्त में आ जाना
-बड़े-बड़े सपने देखना और हकीकत का विपरीत होना
ये उपाय बचा सकते हैं
-तनाव महसूस हो तो व्यायाम और योग करें
-अपने संसाधन और क्षमता के अनुरूप ही काम करें
-सकारात्मक विचारों से बेहतरी की उम्मीद बढ़ाएं
-जहां भी अच्छे काम हो रहे हों वहां जरूर जाएं
-बिना लापरवाही मनोचिकित्सक की सलाह लें
सरकार से अपेक्षाएं
जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम को मजबूत करने के साथ प्राइमरी हेल्थ सेंटर और कम्युनिटी हेल्थ सेंटर पर मनोविशेषज्ञों की तैनाती व दवाओं का समुचित प्रबंध किया जाना चाहिए। पुणे से आए बिग्रेडियर डॉ. एमएसवीके राजू के मुताबिक एमबीबीएस पाठ्यक्रमों में मनोरोग विषय शामिल किया जाना चाहिए। एमडी की सीटें देश के मेडिकल कॉलेजों में बढ़ें। 
मनोरोग विशेषज्ञों की कमी के कुछ आंकड़े
-6000 विशेषज्ञ 130 करोड़ की जनसंख्या पर देश में
-50000 विशेषज्ञ 30 करोड़ की जनसंख्या में अमेरिका में
-75 प्रतिशत मनोरोगियों को मिल पाता है इलाज
-20 लेक्चरर हैं मनोरोग पर एमबीबीएस पाठ्यक्रम में
-01 महीने साइकियाट्री की ट्रेनिंग एमबीबीएस पाठ्यक्रम में
-15 दिन इंटर्नशिप एमबीबीएस की मनोरोग विभाग में
साभार दैनिक हिंदुस्तान 6 अक्तूबर, 2017
समाज में तनाव क्यों है? 
                विभिन्न कारणों से तनाव जीवन का हिस्सा बन चुका है। छोटे छोटे बच्चे स्कूल के सिलेबस की वजह से तनाव में रहते हैं। बेरोज़गारों को जॉब की वजह से तनाव है। कुंवारी लड़कियों को अपनी शादी की वजह से तनाव रहता है। शादी शुदा जोड़ों को अपने पारिवारिक रिश्तों की वजह से तनाव है। अधेड़ माँ-बाप को अपने बच्चों की सुरक्षा की वजह से तनाव है। बूढ़े लोगों को अपने तिरस्कार और ख़ुद को अनदेखा किए जाने का तनाव है। इसके अलावा पड़ोसियों की वजह से तनाव होता है। राजनीतिक उठा पटख़ की वजह से तनाव हो जाता है। चीज़ों के दाम बढ़ने से लेकर मौसम की मार तक हर चीज़ तनाव की वजह बन रही है। विश्व के बड़े देश ग्लोबल वॉर्मिंग की सूचना देकर तनाव का स्तर बढ़ा रहे हैं। बीमारियों की वजह से भी तनाव रहता है। इसके अलावा दूसरी सैकड़ों चीज़ें भी धर्म-प्रचारकों व दाईयों के मन में तनाव बढ़ा रही हैं। दुनिया में मौत, एक्सीडेन्ट्स और जंगों का बड़ा कारण तनाव है। बढ़ती अशान्ति और बढ़ते अपराध के बीच सीधा रिश्ता है। तनावग्रस्त लोग शाँत समाज का निर्माण नहीं कर सकते और न ही वे शाँति के काम कर सकते हैं।

शाँति और सफलता क्यों नहीं मिली?
                मन की शाँति के लिए ही लोग किसी धार्मिक संस्था से जुड़ते हैं, जहाँ इन्हें इनके धर्म-मत के अनुसार नमाज़, क़ुरआन, नमन, हवन, भजन, सुमिरन, ध्यान और आसन सब कुछ सिखाया जाता है, इसके बावजूद इनमें से अधिकांश लोग नकारात्मक भावनाओं से क्यों मुक्त नहीं हो पाते। इन्हें मन की शाँति और जीवन में सफलता क्यों नहीं मिलती? ये विचारणीय प्रश्न हैं। हम किसी धर्म-मत को दोष देकर इन सवालों से नहीं बच सकते क्योंकि यह समस्या सभी धर्म-मतों के अनुयायियों के साथ है।
                पिछले 30 सालों में मैं बड़े बड़े धर्म-मतों के लोगों से मिला। उनके जीवन और उनके दर्शन को मैंने क़रीब से जाना। जो दूर थे, उनकी किताबों की स्टडी की। जिन्होंने बुलाया, उनके सत्संगों और प्रवचनों में गया। मैंने देखा कि आम तौर पर गाँव और क़स्बों से हज़ारों लाखों लोगों की भीड़ कार्यक्रम में शामिल होती है और फिर वह एक सामान्य सन्देश लेकर वापस लौट जाती है। गुरू, पीर और गाइड के पास इतना समय नहीं होता कि वह उनमें से हरेक के व्यक्तित्व की जाँच करके उसी के हाल के अनुरूप शिक्षा दे सके। यह भी विडम्बना है कि ज़्यादातर गुरू, पीर और गाइड बने हुए लोग मनोविज्ञान के नियमों की जानकारी नहीं रखते और वे ख़ुद गम्भीर मनोरोगी की श्रेणी में आते हैं।
                गुरू-शिष्य, पीर-मुरीद और ख़ास व आम, सबको तनावग्रस्त देखकर, उन्हें शाँति की खोज में भटकते हुए देखकर हमने इसके समाधान के लिए एक बहुत छोटी परन्तु बहुत उपयोगी पुस्तिका लिखने का निश्चय किया। जिससे हर धर्म-मत के प्रचारकों और अनुयायियों को लाभ होगा, यह निश्चित है। ...क्योंकि इसे कल्याण के संकल्प और फ़लाह की नीयत से ही लिखा गया है और इसका कॉपीराईट सुरक्षित नहीं रखा गया है। हरेक भाषा के हरेक व्यक्ति को अनुमति है कि वह इसे किसी भी भाषा में अनूदित करके बाँट सकता है।
                हर इन्सान तनाव से मुक्ति पाना चाहता है लेकिन आखि़र इस तनाव से मुक्ति का उपाय क्या है?
                तनाव से मुक्ति के सैकड़ों तरीक़े हैं। जिनमें योग, मेडिटेशन और अवसादरोधी दवाएं Anti Depressent Medicines शामिल हैं। कुछ तरीक़े जटिल हैं और कुछ बहुत महंगे, जिन्हें सब आयु और आय वाले नहीं कर सकते। बहुत लोगों के लिए योग और मेडिटेशन के लिए समय निकालना मुश्किल होता है। योग और मेडिटेशन के लिए बहुत ज़्यादा सावधानियाँ रखनी पड़ती हैं। योगाचार्य बताते हैं कि यम और नियम के अभाव में योग से लाभ के बजाय हानि हो जाती है।

पंच तन-मन कर्म Five Acts of Mind & Body
                हम आपसे बहुत आसान काम करने के लिए कहेंगे।  हम आपको ‘पंच तन-मन कर्म‘ की बहुत आसान तकनीक सिखाएंगे। जिसे हमने अपने वर्षों अनुभव और शोध के बाद डिस्कवर किया है। इस तकनीक में तन मन से पाँच काम किए जाते हैं। तन और मन आपस में जुड़े हुए हैं। तन का असर मन पर और मन का असर तन पर ज़रूर पड़ता है। इसे बच्चा, बूढ़ा, जवान, कुंवारी, विवाहिता और गर्भवती स्त्री, सब समान रूप से आसानी से कर सकते हैं। हरेक देश, भाषा और खान-पान वाले लोग इन कर्मों को कर सकते हैं। अगर आप किसी बीमारी का इलाज करा रहे हैं। तब भी आप अपने डॉक्टर से सलाह लेकर ‘पंच तन-मन कर्म तकनीक’ की प्रैक्टिस कर सकते हैं। आपको चमत्कारी लाभ मिलेंगे।
                1. ख़ुशी: हमने तय किया है कि आप सबको इस तनाव से मुक्ति का आसान और व्यवहारिक उपाय बताया जाए। जिससे आपको ख़ुशी मिलेगी। आपकी ख़ुशी आपके परिवार को ख़ुशी देगी। आप दूसरों को ख़ुशी का यह राज़ बताएंगे तो उन्हें भी ख़ुशी मिलेगी। यह ख़ुशी फैलेगी तो हमें ख़ुशी मिलेगी। तनाव से मुक्ति का एक सबसे बड़ा मंत्र यह है कि आप दूसरों को ख़ुशी देने वाला काम करें। आपको ख़ुशी मिलेगी। ख़ुशी की हालत आपके तनाव को दूर कर देगी।
       आप अपने लिए दूसरों से जैसा बर्ताव चाहते हैं, वैसा बर्ताव आप दूसरों के साथ कीजिए। तब दूसरे आपके साथ वैसा बर्ताव करेंगे, जैसा कि आप उनसे अपने लिए चाहते थे।
       आप किसी अनाथ, बेघर, भूखे आदमी की या सड़क पर भटकते हुए बच्चों की मदद करके देखिए। उसे ख़ुशी मिलेगी। उसी पल आप एक चमत्कार होते हुए देखेंगे कि आपको भी ख़ुशी मिल रही होगी। इससे भी ज़्यादा यह है कि जो लोग मदद के इस सीन को देख रहे होंगे, उन्हें भी ख़ुशी महसूस हो रही होगी। ख़ुशी आपके दिल को ग़म से पाक कर देगी। यह आत्म कल्याण की बुनियादी शिक्षा है। इन्सान की जि़न्दगी का असली मक़सद समाज की सच्ची सेवा करते हुए आत्म-कल्याण करना है। अपना कल्याण आप ख़ुद ही कर सकते हैं, कोई दूसरा आपका कल्याण नहीं कर सकता। दूसरा केवल आपको मार्ग दिखा सकता है, उस पर चलना आपको ही पड़ेगा।
       बुरा रास्ता दिखाने वालों से और नकारात्मक बातें करने वालों से बचें। ये लोग आपकी ख़ुशी को तुरन्त ख़त्म कर देते हैं। इनके पास बैठने के बाद आपको अपने अन्दर ऊर्जा की कमी महसूस होगी। आपको अपने अन्दर घुटन और बेचैनी महसूस होगी। आप लगातार इनके साथ बैठक करते रहे तो फिर आप इन जैसे ही हो जाएंगे। आपके साथ रहकर आपके बच्चे आप जैसे हो जाएंगे। पूरा परिवार गड्ढे में गिर जाएगा और आपको पता भी नहीं लगेगा। आप अपने बच्चों को जैसा बनाना चाहें, वैसा आप ख़ुद बनें। उनके मानसिक स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखें। जब वे बड़े होंगे, तब वे आपको सम्मान और सुख देंगे। आपकी सन्तान फलेगी, आपकी ख़ुशी बढ़ेगी। जो लोग यह काम नहीं करेंगे, वे बुढ़ापे में अपने बेटा और बहू की शिकायत करते हुए मिलेंगे।
       जो भी कर्म आप आज करें, उसका अन्तिम परिणाम ज़रूर देख लें। अन्तिम परिणाम ख़ुशी और कामयाबी देने वाला हो, तभी उस कर्म को करें।
                2. पोषण और सफ़ाईः आप अपने वज़न के हिसाब से दिन भर में इतना पानी ज़रूर पिएं, जिससे आपके शरीर से कचरा बाहर निकल जाए। पानी शान्ति का प्रतीक है। इससे आपको ऑक्सीजन भी मिलती है। पानी बॉडी सेल्स को मिनरल्स व दूसरी ज़रूरी चीज़ें पहुंचाने के लिए बहुत ज़रूरी है। इस फ़कऱ् को पहचानिए कि जब आपको प्यास लगे, तब आप पानी ही पिएं, शर्बत या कोल्ड ड्रिंक नहीं। प्यास लगे तो खाना न खाएं, पानी पिएं। हम रोगियों को जब पानी पीने की सलाह देते हैं, तब वे कहते हैं कि हम पानी कम इसलिए पीते हैं ताकि बार बार वॉश रूम न जाना पड़े। यह बड़ी ग़लती है। आपको बार बार वॉश रूम जाना पड़े तो जाएं लेकिन पानी काफ़ी मात्रा में ज़रूर पिएं। इससे गंदा कचरा और ज़हर बाहर निकलता है। आपके शरीर की शुद्धि होती है।            
                अपने भोजन पर भी ध्यान दें। ऐसा खाना खाएं जिससे आपके शरीर को सभी ज़रूरी तत्व मिल जाएं। कैल्शियम, आयरन और फ़ॉस्फ़ोरस जैसे तत्व खाने से न मिलें तो फिर इनके लिए डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेन्ट लें। ये सप्लीमेन्ट्स भी लगातार नहीं लेने चाहिएं। आसानी से हज़्म होने वाला खाना खाएं। रात का खाना सोने से दो तीन घंटे पहले खा लें।
       रात का खाना हल्का खाएं। सब्जि़यों का जूस जैसे कि लौकी का जूस ले सकते हैं। फल खा सकते हैं। इससे आपकी आँतों की सफ़ाई होगी। बरसों से आँतों पर चिपका हुआ मल साफ़ हो जाएगा। एडल्ट लोगों की आँतों में 20 किलो तक बरसों पुराना कचरा सड़ता हुआ मिला है। पालक का जूस पी सकते हैं। इससे आपके शरीर में ताज़ा ख़ून बनेगा। ख़ून में एसिड लेवल कम होगा। जिससे ख़ून अपनी अल्कलाईन नेचर की तरफ़ वापस आएगा और ख़ून में ऑक्सीजन लेवल बढ़ेगा। हक़ीक़त यह है कि रात के समय शरीर को आराम करने दें। भारी और ज़्यादा भोजन करके आप इसका आराम हराम न करें। आप अपने शौक़ के खानों को सुबह खाएं तो ज़्यादा बेहतर है।
                3. गहरे साँस: दिन में बार बार आप अपने साँस पर ध्यान दें। आप पाएंगे कि आप केवल सीने तक थोड़ा थोड़ा साँस ले रहे हैं। जिससे आपको उचित मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। पेट तक गहरे साँस लें। आप जो भी काम कर रहे हों, उसे करते हुए बीच बीच में आप पेट तक गहरे साँस ले सकते हैं। इससे आपको ऑक्सीजन ज़्यादा मिलेगी। आपको शक्ति और शाँति ज़्यादा मिलेगी।
                4. ग्राउन्डिंग grounding/earthing: यानि अपने शरीर से ज़मीन को छूना। यह चौथा काम है। अगर आप घर या ऑफि़स में बैठे हैं तो आप अपने जूतों में से पैर निकाल कर नंगे फ़र्श पर रख लें। इससे आपको ज़मीन की इलेक्ट्रो-मेग्नेटिक पॉवर मिलेगी। आप सुबह को पार्क में कुछ देर नंगे पैर घास पर चल सकते हैं या ज़मीन पर बैठ सकते हैं। ज़मीन पर खेल सकते हैं। ज़मीन के सम्पर्क में रहें। आपके घर में कच्ची ज़मीन हो या गमले हों तो उनमें अपने हाथों से पौधे लगाएं। उन्हें पानी दें।
       तनाव या डिप्रेशन गहरा हो या पुराना हो तो सूरज निकलने से पहले जाग कर ज़मीन पर बैठ जाएं। पूरब की तरफ़ मुंह करके देखें कि कैसे धीरे धीरे अन्धेरा कम होता है और सूरज की रौशनी फैलती है। ध्यान रखें कि जो आप देख रहे हैं, उसी विषय में आप सोचें। आपका ध्यान भटक जाए तो आप फिर से उसी विषय पर लौट आएं। इसे आप अपने घर की छत या आँगन में कर सकते हैं। आप किसी बाग़ या नदी के किनारे जा सकें, जहाँ शान्ति हो, तो अच्छा है। कुछ दिनों में ही आपको फ़कऱ् नज़र आने लगेगा।
                5. छोटी इलायची: आप छोटी इलायची खाने की आदत डालें। छोटी इलायची को हरगिज़ छोटा न समझें। इसके तन और मन पर बहुत अच्छे असरात पड़ते हैं। सैकड़ों जड़ी बूटियों में से हमने इसे क्यों चुना है? इसका पता आपको ख़ुद चलेगा, जब आप इसे चबाने की आदत बना लेंगे।
                ये पाँचों काम बहुत आसान काम हैं। इन्हें करने के लिए आपको अलग से समय निकालने की ज़रूरत नहीं है। इन्हें करने के लिए आपको किसी से ट्रेनिंग लेने या एक्सपर्ट बनने की ज़रूरत भी नहीं है। इससे आपको तुरन्त लाभ होगा। आपका तनाव तुरन्त कम होगा। आपका नर्वस सिस्टम आपको सपोर्ट करेगा। आपका इम्यून सिस्टम बेहतर काम करेगा। बीमारियों से लड़ने की ताक़त बढ़ेगी। आप यह काम अपने बच्चों को सिखाएंगे तो वे बार बार बीमार नहीं पड़ेंगे। वे अपनी पूर्ण आयु तक जीवित और सुरक्षित रहेंगे। बच्चों की सुरक्षा, यह बहुत महत्वपूर्ण तथ्य है। इस पर ज़रूर ध्यान दें।
                इसके अलावा आपके पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन पर भी इसके बहुत अच्छे असर पड़ेंगे। आपके मन को शान्ति मिलेगी। आप बेहतर फ़ैसले ले पाएंगे। आप अपने जीवन में थोड़ा थोड़ा बदलाव होते हुए पाएंगे। किसी भी वक़्त आपको अचानक बड़ी कामयाबी भी मिल सकती है। शाँति की हालत में अवचेतन मन बहुत अच्छा काम करता है और अवचेतन मन सफलता को आकर्षित करता है। आप अवचेतन मन की शक्ति के बारे में ज़रूर पढ़ें।
अनमोल अनुभूत नुस्ख़े
                दोस्तो! ये वे नुस्ख़े हैं, जिन्हें दुनिया भर में लाखों मरीज़ों ने इस्तेमाल किए हैं और उन्हें तनाव से राहत मिली है। यह लाभकारी जानकारी देने का मक़सद यह है कि आप सेहतमन्द और ख़ुशहाल रहें। ज़्यादा जानकारी के लिए आप इन्टरनेट पर पढ़ सकते हैं या फिर हमसे सम्पर्क कर सकते हैं। हम आपकी मदद के लिए, आपको घर बैठे मुफ़्त सलाह देने के लिए तैयार हैं। हम चिकित्सा को जनसेवा का माध्यम समझते हैं। आपका भला करना हमारा मक़सद है। बरसों की रिसर्च के बाद हम आपको अनमोल मोतियों जैसे ये अनुभूत नुस्ख़े दे रहे हैं।
आमदनी के बढ़ाने के उपाय
                हम आपको छोटी इलायची के कुछ और फ़ायदे बता रहे हैं। जो बहन भाई बेरोज़गारी या कम आमदनी की वजह से तनाव में हैं, वे इन नुस्खों को तैयार करके सेवा के साथ आमदनी भी कर सकते हैं। आप देख सकते हैं कि बहुत से नौजवान देसी दवाएं बेचकर अच्छी आमदनी कर रहे हैं। इन्टरनेट के माध्यम से भी आप दवा, मसाले या दूसरे प्रोडक्ट्स बेचकर अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। इन्टरनेट पर बहुत से वीडियोज़ में पूरा तरीक़ा और क़ानून बताया गया है। तनाव की वजह जो भी हो, उसका हल मौजूद है।
हरेक समस्या को हल करने का सही तरीक़ा    
       हमारी शिक्षा यह है कि आप अपनी समस्या का समाधान तलाश करें और फिर उस समाधान को साकार करने पर मेहनत करें। आपको सुख-शाँति, समृद्धि और सफलता ज़रूर मिलेगी। हर समस्या को आपसे पहले भी लोगों ने हल किया है। उन्होंने उस समस्या के हल बताए हैं। जिन लोगों ने उस समस्या को हल किया है, आप उनसे मिलें। उनके तजुर्बात से फ़ायदा उठाएं।
       हमने तनाव मुक्ति के जो पाँच काम बताए हैं, आप इन्हें सिखाने की क्लास भी अपने घर में या किसी पार्क में संचालित कर सकते हैं। इसे आप निःशुल्क या फ़ीस लेकर, दोनों तरह सिखा सकते हैं। हमारी ओर से पूर्ण अनुमति है। आप इस किताब को छाप कर निःशुल्क या क़ीमत लेकर जैसे आपको सुविधा हो, वैसे बाँट और बेच सकते हैं। हमारी ओर से आपको इसकी अनुमति है।
       हर देश में सेवा और व्यापार के अपार अवसर मौजूद हैं। भारत में भी आय के अनन्त अवसर हैं। आप इनसे तब लाभ उठा सकते हैं, जब आप दूसरों की किसी समस्या को हल करते हैं। बदले में फ़ायदा उठाने वाले लोग आपको ख़ुशी से रूपये देते हैं। आप अपनी सेवा का शुल्क ले सकते हैं। यह पूरी तरह वैध और क़ानूनी है। निर्धनों को यह तकनीक निःशुल्क ही सिखानी होगी।

नौकरी, व्यापार और धन पाने का तरीक़ा
                जिस काम को आप पसन्द करते हैं और उससे दूसरों का भला भी होता है, आप उसमें पूरी महारत हासिल कर लीजिए। फिर उसके बाद आप उस काम के ज़रिये कमाई कर सकते हैं। जब आप दूसरों से अच्छी क्वालिटी की सेवा देते हैं तो आपका काम बढ़ने लगता है। अगर आप उस काम में दूसरों से ज़्यादा माहिर हो जाते हैं तो आपके पास दूर दूर से काम आने लगता है।
                जिस काम को आप पसन्द नहीं करते, जब आप दूसरों को देख कर उसे करते हैं तो आप उसे पूरे शौक़ और पूरे जोश से नहीं कर सकते। जिससे काम की क्वालिटी घटिया रहती है। आप लोगों को सन्तुष्ट नहीं कर पाते। आपको कम काम मिलता है। एक समय ऐसा आता है, जब आपका काम चलना बन्द हो जाता है। बुरे लोगों की और नशेबाज़ों की सोहबत भी काम को चैपट कर देती है। अपने काम को बढ़ाना या घटाना नियमों के अधीन है। इस किताब में हमने इन नियमों को इसलिए समझाया है ताकि आपको अपने काम बनाने के लिए किसी फ़र्ज़ी बाबा के पास जाने की ज़रूरत ही न रहे।
                अगर आप जॉब करना चाहते हैं तो प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अन्तर्गत आपको 416 जॉब रोल्स में से आपकी पसन्द का काम 3 माह के कोर्स में सिखाया जा रहा है। लड़के लड़कियों को किताबें और स्कॉलरशिप भी दी जा रही है। इन कामों को सीख कर आप जॉब कर सकते हैं या आप चाहें तो अपना काम शुरू कर सकते हैं। किसी काम को छोटा न समझें। पीपल का बीज शुरू में छोटा सा ही दिखता है। जब उसे बो दिया जाता है तो प्रकृति उसे सपोर्ट करती है। धीरे धीरे वह एक विशाल वृक्ष बन जाता है। ऐसे ही आपका काम भी बढ़ेगा। मेरा काम भी ऐसे ही बढ़ा है। विकास का प्राकृतिक विधान यही है।
                मैं ऐसे लोगों को जानता हूँ, जिन्होंने परिवार की ज़रूरतों के लिए पहले मज़दूरी की। फिर छोटा सा व्यापार शुरू किया और फिर उन्होंने कोठी, कार और समाज में ऊँचा मक़ाम सब कुछ बना लिया। आज उनकी सन्तान पैदाईशी रईस है।
                मेरे परिचितों में अनगिनत लोगों ने छोटी सी शुरूआत की। जितने लोग बुरी सोहबत से बचे रहे और पूरी लगन से डटकर अपना काम करते रहे, वे सब कामयाब हो गए। समाज और सरकार की शिकायतें न कीजिए, किसी बाबा से उम्मीदें मत लगाईये। अपने विकास के लिए ख़ुद रास्ता तलाश कीजिए और फिर उस पर एक एक क़दम आगे बढि़ए। आपको सफलता मिलेगी।
                आपके पास बाप दादा की कोई जायदाद नहीं है, आपके पास कोई बड़ी पूंजी नहीं है, तब भी आप कमा सकते हैं। आप अपने दिमाग़ का इस्तेमाल कीजिए। आजकल तनाव दूर करने की कोचिंग देकर भी पैसा कमाया जाता है। बहुत से ऐसे काम हैं, जिनमें आप सिर्फ़ सलाह और मार्गदर्शन देकर ही काफ़ी रूपया कमा सकते हैं। जब लड़का और लड़की आर्थिक रूप से मज़बूत हो जाते हैं, तब उनका शोषण आसान नहीं रह जाता। धर्म प्रचारक ख़ुद को मज़बूत बनाकर शोषण से बच सकते हैं। अपनी मदद आप कीजिए। जिन कामों के लिए आम आदमी किसी बाबा के पास जाते हैं या किसी ऑर्गेनाइज़ेशन में शामिल होते हैं, उन कामों को अब आप ख़ुद कर सकते हैं। इसीलिए यह पुस्तिका लिखी गई है।
               
छोटी इलायची के बड़े फ़ायदे
chhoti elaichi ke bade fayde
1.     मानसिक तनाव से मुक्ति- यदि आप किसी भी कारण से तनाव से ग्रसित हैं तो इलायची खाने या उसकी चाय बना कर पीने से हमारे दिमाग के हार्मोंस एक दम से बदल जाते हैं और आप तरोताज़ा महसूस करते हैं।
2.     इम्यून सिस्टम तेज़ करता है – यह हमारा पाचन तंत्र मजबूत करती है दोस्तों अकसर देखा जाता है की खाने के बाद पान मसाला या इलायची या फिर सौंफ ये चीजें खाई जाती है, कभी सोचा है ऐसा क्यों होता है? ऐसा इसलिये होता है क्योंकि इनमें कुछ ऐसे पोषक तत्व पाये जाते हैं जो जल्दी से खाने को पचा देते हैं, और पेट को सही रखते हैं।
3.     गले की ख़राश दूर करना – गला बैठ जाने या गले की खराश को दूर करने के लिये सुबह उठकर छोटी इलायची चबा-चबा कर खाने से  गले की खराश दूर होती है ।
4.     विषाक्त तत्वों को निकाल देती है- दोस्तों हम शरीर की बाहरी सफाई का तो बड़ा ध्यान रखते हैं, लेकिन यह भूल जाते है कि हमें अंदर की सफाई भी उतनी ही जरुरी होती है जितनी बाहर की अब आप सोच रहें होंगे की बाहर की सफाई तो नहा कर हो सकती है। लेकिन अंदर की कैसे करे ? उसके लिये आपको ज्यादा कुछ नहीं करना बस एक इलायची रोजाना खानी है जी हाँ यह हमारी किडनी से विषाक्त तत्वों को बाहर कर देती है तो हो गई ना अन्दर की भी सफाई।
5.   5.  जी मिचलाने में लाभकारी– उल्टी जैसा फील होने पर आप पानी में इलायची को उबाल कर वह पानी पिये उल्टी बंद हो जाती है। काफी लोगों को बस का सफर सूट नहीं करता तो अब जब भी आपको उलटी जैसा फील हो तो एक इलायची मुँह में रख कर उसका रस चूसते रहें | आपको अच्छा लगेगा।
6.     दिमाग़ और आँखों के लिये लाभकारी– 2 से 3 बादाम और 2 से 3 पिस्ते लेकर इलायची के दानों के साथ इन्हें महीन पीस लेते हैं और इस मिश्रण को हम दूध में डालकर पीते हैं तो इससे हमारी यादाश्त के साथ- साथ हमारी आँखों की रोशनी भीं बढ़ेगी साथ ही हमारे दिमाग को भी ताकत मिलेगी ।
7.     ख़ून बढ़ाती है इलायची : इलायची में मौजूद है एक महत्वपूर्ण धातु यानी तांबा भी मौजूद है जो रक्तअल्पता जैसी बीमारी से निजात दिलाता है रण पैदा हुए लक्षणों को कम करने में इलायची महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रक्तअल्पता दूर करने के लिए इलायची पावडर को हल्दी के साथ गर्म दूध में डालकर लेना चाहिए।
8.     नशा कम करना- यदि आपको किसी तरह के नशे से बचना है तो आप जब तब एक इलायची चूस ले दोस्तों नशा सिर्फ शराब का ही नहीं होता हर वो चीज जिसके बिना हम रह नहीं पाते जैसे कुछ लोगों को चाय पीने की लत होती है वह जानते है की चाय उनके लिये नुकसानदेह है। फिर भी वह चाय को चाह कर भी छोड़ नहीं पाते उनके सिर में दर्द हो जाता है। काम नहीं हो पाता तो यह भी एक तरह का नशा है तो इससे बचने कै लिये आप इलायची का इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि इसमें कुछ ऐसे तत्व पाये जाते हैं जो तनाव को कम कर देते है।
            9. यौन दुर्बलता कम करने के लिये –  आपको हैरत होगी यह जानकर कि इलायची जैसी छोटी सी चीज से भी कामेच्छा बढ़ाई जा सकती हैं यह विज्ञान में भी साबित किया गया है। इसके लिये आपको करना ये है कि दूध में एक इलायची उबाल कर  दूध को ठंडा करके उसमें असली शहद मिलाकर पीना है इससे मर्दाना कमज़ोरी दूर होती है और यौन क्षमता बढ़ती है।बाज़ार में आमतौर से असली शहद कम मिलता है। आप हमसे असली शहद मंगा सकते हैं। इसके अलावा भी हमारे कई बहुत असरदार शक्तिवर्धक नुस्ख़े हैं, जिन्हें आप हमसे मंगा सकते हैं। जिनसे आप लाभ उठा सकते हैं।
10. आँखों से पानी बहना- यदि कोई आँखों के बहने कि समस्या से ग्रसित है तो वह रोज रात को दूध में इलायची उबाल कर पिये कुछ ही दिनों में पानी बहना बंद हो जायेगा ।             
ज्ञान बढ़ाएं, शक्ति बढ़ेगी
आजकल मोटी किताबें पढ़ने का चलन कम है। इसलिए हमने इस पुस्तिका को छोटा रखा है। पंच तन-मन कर्म तकनीक में बताए गए पाँचों कामों के बारे में आप इन्टरनेट पर विस्तारपूर्वक ज़रूर पढ़ें। मिसाल के तौर पर आप The Science of Happiness, Water Therapy, Benefits of Earthing, Benefits of Deep Breathing और Power of Subconscious Mind को गूगल सर्च के ज़रिये पढ़ते हैं तो आपको हर सब्जेक्ट पर विस्तार से जानकारी मिल जाएगी। यह पुस्तिका आपको इसी ओर ध्यान दिलाने के लिए लिखी गई है।
                अगर आप किसी बीमारी का इलाज करा रहे हैं। आपको रोग से मुक्ति नहीं मिल रही है। तब आप अपने डॉक्टर से सलाह लेकर ‘पंच तन-मन कर्म तकनीक’ की प्रैक्टिस कीजिए। आपको चमत्कारी लाभ मिलेंगे। यह तकनीक इलाज के किसी तरीक़े का विरोध नहीं करती। न ही यह किसी पैथी या थिरेपी का विकल्प है। यह आपको नेचुरल हीलिंग सिस्टम के प्रति जागरूक बनाती है। जो आपके अन्दर और प्रकृति में हमेशा काम करता है लेकिन आप उससे जाहिल बने हुए हैं। इसी जहालत की वजह से आप बीमारियों और ऑप्रेशन के शिकार बनते हैं। डॉक्टर और दवाएं आपकी मददगार हैं लेकिन अपनी सेहत के लिए आपको अपनी ज़िम्मेदारी समझनी होगी। तन मन से हेल्थ को सपोर्ट करने वाली आदतें अपनानी होंगी।
       इस पुस्तिका के कॉपीराईट सुरक्षित नहीं हैं। इसे कल्याण के संकल्प और फ़लाह की नीयत से ही लिखा गया है और इसका कॉपीराईट सुरक्षित नहीं रखा गया है। हरेक भाषा के हरेक व्यक्ति को अनुमति है कि वह इसे बिना काट छाँट किए किसी भी भाषा में अनूदित करके बाँट सकता है। इस पुस्तिका से आपको जो लाभ मिलें, आप हमें लिखकर ईमेल कर दें। हम नए संस्करण में आपके नाम, फ़ोटो और अनुभव को प्रकाशित करेंगे।

Email:allahpathy@gmail.com

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 निराशा एक रोग है दीपिका पादुकोण

Monday, October 9, 2017

seb ka sirka banayen, सिरका बनाएं, माल कमाएं How to Make apple cyder vinegar?

सिरका बनाएं, माल कमाएं
सिरका खाना सुन्नत है। सहाबा और सहाबियात सिरका बनाना जानते थे। वे सिरका बनाते और बेचते थे। आज भी सिरका बनाकर बेचा जा रहा है। आज हम इसके व्यापार से आर्थिक लाभ के बारे में बात करेंगे।

दावत और समाज सेवा के मुबारक काम में हर उम्र और हर इन्कम के लोग लगे हुए हैं। यह शाँति के लिए शाँति के साथ किया जाना वाला काम है। इस काम में रूपया लगता है लेकिन सीधे तौर पर इस काम से कोई इन्कम नहीं होती। इस काम में औरतें और स्टूडेन्ट्स भी लगे हुए हैं। इन्हें अपने लिए और दावती किताबें बांटने के लिए काफ़ी रूपये की ज़रूरत होती है। स्टूडेन्ट्स की अपनी ज़रूरतें भी होती है, जिनके लिए उन्हें उस रूपये से ज़्यादा रूपया दरकार होता है जो कि पेरेन्ट्स उन्हें देते हैं। ये लोग कहीं जाॅब नहीं कर सकते क्योंकि इस से एजुकेशन पर बुरा असर पड़ेगा। कई लड़कियां और औरतें पर्दे और घरेलू कामों की वजह से बाहर की नौकरी नहीं करतीं। वे बच्चों की ज़िम्मेदारी की वजह से भी कोई ऐसा काम नहीं कर सकतीं, जिसमें उनका बहुत ज़्यादा टाईम खप जाए।
इन सब हालात में हम आपके लिए रूपया कमाने का एक ऐसा तरीक़ा लाए हैं, जिसमें आप पानी से पैसा कमा सकते है। इस काम में आपका ज़्यादा वक़्त नहीं लगेगा और नफ़ा काफ़ी होगा।

एक साल में बनें लखपति
आप पानी को सिरके में बदल कर, उस सिरके को देसी दवाख़ानों को बेचकर काफ़ी पैसा कमा सकते हैं। खजूर का सिरका, गन्ने का सिरका, जामुन का सिरका और सेब का सिरका जैसे बहुत तरह के सिरकों की बाज़ार में भारी मांग है। हम आपको यहां सेब का सिरका बनाने की जानकारी दे रहे हैं। आप इसे पैक करके बाज़ार में भी बेच सकते हैं। बाज़ार में सेब का ऑर्गेनिक सिरका 1250 रूपये लीटर बिक रहा है। आप इसे होलसेल में कम रूपये में बेच सकते हैं। होलसेल में आप 50 प्रतिशत कमीशन पर भी देते हैं तो भी आपका सिरका 625 रूपये प्रति लीटर बिकेगा। एक महीने में 1000 लीटर बिक्री के बाद आपको 6,25,000 मिलेंगे। जिनमें से ख़र्च निकाल कर आपको 6 लाख रूपये बच जाएंगे। एक साल में यह आमदनी 72 लाख रूपये हो जाएगी। अगर आप पहले साल में यह टारगेट पूरा न कर सके तो आप दो या तीन साल में यह टारगेट पूरा कर लेंगे। अगर आपको कोई अच्छा होलसेलर मिल गया तो आप इस टारगेट को 6 माह में भी पूरा कर सकते हैं।
यह सब एक दिन में और एक दम नहीं हो जाएगा। इसमें थोड़ा टाईम लगेगा। आपको ग्राहक तलाश करने में वक़्त लगेगा। ...लेकिन यह होगा ज़रूर, इन् शा अल्लाह! 

रजिस्ट्रेशन और इजाज़त का तरीक़ा
इसके लिए आपको खाद्य विभाग से FPO यानि Food Processing Order लेना होगा। इसके लिए आप अपने क़स्बे या शहर के किसी टैक्स वकील से मिलें। वह आपको पूरा तरीक़ा बता देगा। आप अपने मिलने वालों को थोड़ा बहुत सिरका बिना के भी बेच सकते हैं। उससे मिलने वाली रक़म से आप बाद में भी ले लें। आपके सब काम आसानी से हो जाएंगे। इसके बारे में आप यूट्यूब से भी जानकारी ले सकते हैं। बाक़ी जानकारी आप सम्बन्धित विभागों से ले लें। 
इसके बाद आप अपनी फ़ूड कम्पनी के नाम से ख़ूबसूरत पैकिंग में सिरका पैक करके बेच सकते हैं। पैकिंग के लिए बोतलें आपको पालिका बाज़ार दिल्ली से बहुत सस्ती मिल जाएंगी। इसके अलावा आप अचार, चटनी और मुरब्बे बग़ैरह भी बना सकते हैं। एक सरकारी विभाग सिरके, मुरब्बे, अचार, चटनी और जैम वग़ैरह बनाने की ट्रेनिंग और सर्टिफ़िकेट भी देता है। जिसकी जानकारी आपको ज़िला उद्योग केन्द्र से मिल जाएगी।

इम्पोर्ट एक्सपोर्ट का लाइसेन्स
टैक्स के वकील की मदद से आप इम्पोर्ट एक्सपोर्ट का लाइसेन्स बनवा लें। यह बहुत कम फ़ीस में बन जाता है। इसके बाद आप अपने माल को विदेश में भी बेच सकते हैं। विदेश के आॅर्डर को आप आॅनलाईन पा सकते हैं।

सेब सस्ता लेने का तरीका
आजकल सितम्बर अक्तूबर में सेब सस्ता हो जाता है। छोटे साईज का सेब 5 रूपये से लेकर 10 रूपये किलो तक मिल रहा है। कुछ सेब में हल्की सी चोट लगने की वजह से उनकी क्वालिटी गिर जाती है। आप उन चोट लगे हिस्सों को काटकर सेब को साफ़ कर लें। सिरका डालने के लिए बड़ा साईज़ या उसका लाल रंग काम नहीं आता। आप छोटे साईज़ के या हरे रंग के सेब ले लें। ये आपको सस्ते पड़ेंगे। ज़्यादा सेब लें तो फलों की आढ़त में जाकर लें। आपको और ज़्यादा बचत होगी।

वेस्टेज को रूपयों में बदलने का तरीक़ा
अपनी घरेलू ज़रूरत के लिए असली आॅर्गेनिक सिरका आप मुफ़्त में तैयार कर सकते हैं। आम तौर से घरों में सेब आते हैं तो उनके बीज के साथ कुछ गूदा और उनकी डंडी व छिलके फेंक दिए जाते हैं। आप इन्हें फेंकने के बजाय किसी जार में डालकर पानी भर दें और फिर उसे सूती कपड़े से कसकर बाँध दें। एक माह में आपकी वेस्टेज से आपके लिए 2500 रूपये क़ीमत का 2 लीटर सिरका तैयार हो जाएगा।

बनाने का तरीक़ा

एक चौड़े मुंह वाला बर्तन लें। इसमें सेब के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर डाल दें। अब मिटटी के मटके या जार के मुंह तक पानी भर दें। अब इसे खुला छोड़ दे। कुछ समय बाद सेब के टुकड़े लाल होने शुरू हो जाएंगे। अब इसे आप कुछ दिन के लिए ऐसे ही छोड़ दें। किसी साफ़ लकड़ी से या लकड़ी के चम्मच से सेब के टुकड़ों को रोज़ाना नीचे की तरफ़ धकेलें। बस यही थोड़ी सी केयर करनी है। एक हफ़्ते बाद जार के ऊपर सूती कपड़ा बांधकर अंधेरे स्थान पर रख दें। कुछ-कुछ दिन पर इसकी देखभाल करते रहे। करीब एक महीने बाद आप सूती कपड़े की मदद से इस मिश्रण को एक अलग बर्तन में छान लें। सेब के गले हुए टुकड़ों को हाथ न लगाएं। उन्हें छानकर अलग कर लें। नया सिरका बनाएं तो उसमें इन्हें डाल दें। इससे सिरका जल्दी बनेगा। बाकी बचा हुआ मिश्रण सेब का सिरका होगा।
सेब का सिरका बनाने का तरीक़ा यूट्यूब की कई वीडियोज़ में बताया गया है। आप वहां देख लें। कई वीडियोज़ देखने से आपको सिरका बनाने के सभी पहलुओं की जानकारी हो जाएगी-

अपने प्रोडक्ट को बेचने का तरीक़ा
आप शुरू में 5-10 लीटर पानी को मिट्टी के मटके में डालकर सेब का सिरका बनाएं। इससे आपको काॅन्फ़िडेन्स आ जाएगा कि मैं सिरका बना सकता हूं। यह बहुत आसान काम है। सब कुछ नेचर अपने आप करती है।
इसके बाद आप ज़्यादा सिरका बनाएं। फिर आप इसके लिए ग्राहक तलाश करें। इसके लिए आप सेब के सिरके के फ़ायदों के कुछ पर्चे छापकर अपने वार्ड में और अपने दोस्तों में बांट दें कि कि यह हाज़्मे को दुरूस्त रखता है, दिल की बीमारियों को दूर करता है, बी.पी और कोलेस्ट्रोल को बेलेन्स करता है और बालों को झड़ने से रोकता है, डायबिटीज़ के पेशेन्ट्स को फ़ायदा देता है और यह मोटापा कम करता है। सेब के सिरके के के फ़ायदों को जितना ज़्यादा बताएंगे, उतनी ज़्यादा आपकी सेल बढ़ेगी। इसलिए ज़्यादा से ज़्यादा प्रचार करें। आप कुछ फ़ायदे इस लिंक पर देख सकते हैं-
उस पर लिख दें कि सेब का असली सिरका बाज़ार से सस्ते दाम पर इस पते पर मिलता है और मोबाईल नम्बर यह है। अपने व्हाट्सएप्प ग्रुप में भी इस मैसेज को बार बार रिपीट करें। आपके पास थोड़ी थोड़ी डिमांड आने लगेगी। आपको ज़्यादा डिमांड चाहिए तो आप इस मैसेज को ख़ूबसूरत इमेज पर लिखें और फ़ेसबुक ग्रुप्स में डालें। आपके पास इतनी ज़्यादा डिमांड आ जाएगी कि आप उसे पूरा नहीं कर पाएंगे। आप आॅनलाईन होलसेल बाज़ार की वेबसाईट्स के ज़रिये भी ग्राहक तलाश कर सकते हैं। अगर आप हर महीने हज़ार-डेढ़ हज़ार लीटर सिरका बेच लेते हैं तो आप एक साल में 72 लाख रूपये से ज़्यादा कमा सकते हैं।

आप रजिस्ट्रेशन के बाद अपने फ़ूड प्रोडक्ट्स को खादी ग्रामोद्योग संस्थान के काउन्टरों पर भी बेच सकते हैं।आप रजिस्ट्रेशन के बाद अपने फ़ूड प्रोडक्ट्स को खादी ग्रामोद्योग संस्थान के काउन्टरों पर भी बेच सकते हैं। आप अमेज़न और दूसरी वेबसाईट्स के ज़रिये भी अपने प्रोडक्ट्स बेच सकते हैं। आॅनलाईन माल सेल करने के लिए भी आप यूट्यूब पर वीडियोज़ देख सकते हैं।

स्टूडेन्ट्स के लिए यह बहुत फ़ायदेमन्द व्यापार है
जिन स्टूडेन्ट्स के माँ बाप की आमदनी कम है और वे हायर एजुकेशन का सपना दिल में पाले हुए हैं। वे इस तिजारत से बहुत ज़्यादा फ़ायदा उठा सकते हैं।

बूढ़ों, बेवाओं और यतीम बच्चों को सिरका बनाना और बेचना सिखाएं
इससे वे फ़ायनेन्शियली मज़्बूत होंगे। उन्हें अपनी ज़रूरतों के लिए किसी दूसरे पर निर्भर नहीं रहना होगा। वे अपनी आबरू और अपने आत्म सम्मान की रक्षा कर पाएंगे। बूढ़े लोग भी टीन एजर्स को अपने साथ लगाकर अपने माल को बेच सकते हैं। टीन एजर्स में बहुत जोश होता है। वे किसी भी माल को आसानी से बेच सकते हैं। आजकल उन्हें मोबाईल और इन्टरनेट के लिए अलग से कुछ ज़्यादा रक़म की ज़रूरत पड़ती है। बूढ़े लोग उन्हें अपने प्रोडक्ट को उनके फ़ेसबुक ग्रुप पर प्रमोट करने के लिए कहें। इससे देानों को फ़ायदा होगा।


मेंटल हेल्थ सर्वे: यूपी के 20 लाख युवा डिप्रेशन के शिकार,ये है वजह

यह लेख देश के उन युवकों के लिए बहुत बड़ी दवा साबित हो सकता है जो कि बेरोज़गारी की वजह से हताशा के शिकार हैं।


'बड़े-बड़े सपने लेकर जिंदगी की शुरुआत करने वाले युवा जब हकीकत की बेरहम जमीन पर खुद को असुरक्षित महसूस करता है तो उसके अंदर हताशा घर करने लगती है। हताशा की ऐसी ही कई स्वनिर्मित वजहों के चलते प्रदेश में बड़ी संख्या में युवा हताशा की प्रवृत्ति का शिकार हो रहे हैं। यह हताशा उन्हें नशे की लत में धकेलने से लेकर जिंदगी से मोहभंग तक खींच ले जा रही है। उत्तर प्रदेश स्टेट मेंटल हेल्थ सर्वे रिपोर्ट में ऐसा ही एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सैंपल सर्वे के आधार पर तैयार रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश के 20 लाख से ज्यादा कामकाजी युवाओं में जिंदगी जीने का हौसला घट गया है। यह संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। 
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में आयोजित तीन दिवसीय भारतीय साइकियाट्रिक सोसाइटी सेंट्रल जोन के वार्षिक अधिवेशन में इस रिपोर्ट पर चर्चा की गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि प्रदेश के 1.95 करोड़ लोग किसी न किसी तरह की मानसिक बीमारी का शिकार हैं। इस संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है।

यहां बताया गया कि सर्वे रिपोर्ट उत्तर प्रदेश मेंटल हेल्थ अथॉरिटी को सौंप दी गई है। यह रिपोर्ट प्रदेश के कुछ जिलों में सैम्पल सर्वे के आधार पर तैयार की गई है। संगठन के सेंट्रल जोन के नवनियुक्त चेयरमैन डॉ. रवि कुमार के मुताबिक रिपोर्ट भयावह स्थित दर्शाती है। ओपीडी में आने वाले लगभग 95 फीसदी मरीज डिप्रेशन के किसी न किसी स्टेज में हैं। यह समस्या शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बढ़ रही है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में कुछ अधिक है। युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी, किसी न किसी तरह के नशे की प्रवृति के चलते डिप्रेशन के साथ ही मूड डिसआर्डर जैसी गम्भीर बीमारियां बढ़ा रही हैं। '
(हिंदी दैनिक हिन्दुस्तान 6 अक्तूबर, 2017)
युवाओं को जानना चाहिए कि उनके सपने साकार हो सकते हैं। उन्हें अपने आस पास मौजूद व्यापार के मौक़ों को पहचानना और उनसे काम लेना सीखना होगा। भारत में व्यापार के अपार मौक़े हैं। जब आप ख़ुद का व्यापार करते हैं तो आप दूसरों को रोज़गार देने वाले बनते हैं। देने वाला हाथ माँगने वाले के हाथ से बेहतर होता है।

घर की औरतें भी बना सकती हैं सेब का सिरका
मान लीजिए आप तब्लीग़ी जमात के चिल्ले में या किसी दीगर जमात के काम से दावती सफ़र पर जाने वाले हैं तो आप जाने से पहले सेब का सिरका डाल जाएं और घर की औरतों व लड़कियों को बता दें कि उन्हें उसकी केयर कैसे करनी है। जब आप महीने भर बाद लौटेंगे तो आपको सेब का सिरका तैयार मिलेगा। बस आपको उसे पैक करके बेचना होगा। इस तरह बैक्टीरिया की शक्ल में क़ुदरती मज़्दूर आपके लिए आपके पीछे आपके घर पर काम करते रहेंगे। जब आप लौटेंगे तो आपको अपने बीवी बच्चों की किफ़ालत के लिए सिरके की शक्ल में तिजारत का सामान तैयार मिलेगा। भैंस बकरी पालने वालों से ज़्यादा मुनाफ़ा आप इन बैक्टीरिया के ज़रिये कमा सकते हैं।

आप पाँच सात मटकों में अलग अलग फलों का सिरका भी डाल सकते हैं। सुन्नत के पाबन्द हज़रात आपके असली सिरके को खाकर सुन्नत पर अमल करना ज़रूर चाहेंगे।

Hadith on Vinegar: The Prophet liked to eat food with vinegar

Aisha reported: The Prophet, peace and blessings be upon him, said, “The best of condiments is vinegar.”
Source: Sahih Muslim 2051
Grade: Sahih (authentic) according to Imam Muslim
عَنْ عَائِشَةَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ نِعْمَ الْأُدُمُ أَوْ الْإِدَامُ الْخَلُّ
2051 صحيح مسلم كتاب الأشربة باب فضيلة الخل والتأدم به
दाई के आर्थिक विकास को भी तवज्जो देना ज़रूरी है
अल्लाह के नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम दाईयों की और आम नागरिकों की वेलनसे, उनकी सेहत, उनके निकाह और उनके रोज़गार को बहुत अहमियत देते थे क्योंकि दीन का मक़सद लोगों की फ़लाह यानि वेलनेस है, दोनों जहानों में। वेलनेस के लिए आर्थिक रूप से मज़्बूत और आत्म निर्भर होना बहुत ज़रूरी है। आपको यह लेख पसन्द आया हो या कोई सलाह देनी हो या कोई सवाल करना हो तो कमेन्ट बाॅक्स में कमेन्ट कीजिए। हर धर्म मत के लोग इस लेख से फ़ायदा उठा सकते हैं। इस लेख को दूसरों तक पहुंचाएं। इसे फ़ेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर करें.

Saturday, October 7, 2017

सऊदी अरब में सरकारी टी वी पर म्यूज़िक और गाना शुरू

दावती जमातों के लिए यह नई जानकारी हैरतनाक होगी कि  सऊदी अरब में सरकारी टी वी पर म्यूज़िक और गाना  शुरू हो चूका है. ७ अक्टूबर २०१७ राष्ट्रीय सहारा उर्दू की खबर देखें:

Friday, October 6, 2017

Gujrat High Court: Hindu putri Dharm Parivartan par sanpatti se vanchit nahi hogi

हिन्दू पुत्री धर्म बदलने पर संपत्ति से वंचित नहीं होगी-गुजरात हाईकोर्ट
देखें यह समाचार

Wednesday, September 13, 2017

Namaz in Hindi नमाज़ की प्राचीनता और उसके लाभ हिंदी में

Great Research on Namaz: योग दर्शन, बाइबिल और क़ुरआन के आधार पर नमाज़ की जानकारी को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें. इस लेख में magzine ke pages ki 5 images hain. inhen download karke article padhen.
यह एक बहुत ज्ञानवर्धक लेख है. इसे ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें.






योग दर्शन, बाइबिल और क़ुरआन के आधार पर नमाज़ की जानकारी को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें.

Wednesday, August 30, 2017

Being Human, Being Muslim

मुस्लिम बनने का तरीक़ा

एक हिन्दू भाई ने सवाल किया है कि मुसलमान बनने का तरीक़ा क्या है?

जवाबः मुस्लिम बनने का सही तरीक़ा होश में आना है, जागरूक होना है उस सत्य के प्रति जो कि मनुष्य के शरीर में और इस यूनिवर्स में हर तरफ़ आँखों से देखा जा सकता है और जिस पर बुद्धि से विचार करके निष्कर्ष निकाला जा सकता है।

शरीर के अन्दर और बाहर हर चीज़ का एक डिज़ायन है और हर चीज़ नियमों के अधीन है। हर चीज़ प्रकृति के नियमों का पालन कर रही है। सारी चीज़ें आपस में मिलकर एक यूनिट की तरह काम कर रही हैं, जैसे कि हाथ, पैर और दिल व गुर्दे सब अलग अलग भी हैं और वे सब आपस में मिलकर एक शरीर भी हैं।
मनुष्य भी इस यूनिवर्स का, इस प्रकृति का हिस्सा है। मनुष्य में भी डिज़ायन और लाॅ पाए जाते हैं। मनुष्य की हर चीज़ में डिज़ायन और लाॅ पाया जाता है। जब डिज़ायन है तो कोई डिज़ायनर भी है। जब लाॅ है, नियम है तो कोई नियामक शक्ति भी है। उसी को ईश्वर, अल्लाह, गाॅड कहते हैं। वह एक ही है। उसके साथ कोई पार्टनर नहीं है। कोई उसका सहायक नहीं है। कोई उसकी पत्नी, बेटी या बेटा नहीं है। मनुष्य की भाँति उसने किसी से जन्म नहीं लिया और न ही उसने किसी को मनुष्य की भाँति जन्म दिया है। उसी ने हर चीज़ को पैदा किया है। उसी ने इन्सान को पैदा किया है। उसी ने इन्सान को बुद्धि, भावना और चेतना दी है।
हर चीज़ अपने गुणों को ज़ाहिर कर रही है। सूरज अपनी रौशनी और ताप को ज़ाहिर कर रहा है। पानी अपनी पवित्रता और ठण्डक को ज़ाहिर कर रहा है। घास अपनी हरियाली को, पहाड़ अपनी ऊँचाई को और आसमान अपने फैलाव को ज़ाहिर कर रहा है। इन्सान को भी चाहिए कि वह अपनी इन्सानियत को ज़ाहिर करे।
इन्सान होने का मुख्य गुण क्या है?
पवित्र क़ुरआन के अनुसार इन्सान का सबसे बड़ा गुण ज्ञान है। इन्सान को चाहिए कि वह ज्ञान के गुण को ज़ाहिर करके अपने इन्सान होने को ज़ाहिर करे। अज्ञान के काम करना इन्सानियत के खि़लाफ़ है।
हर मनुष्य की शारीरिक और मानसिक शक्तियाँ कुछ निश्चित नियमों के अधीन काम करती हैं। कोई भी मनुष्य इन नियमों का उल्लंघन नहीं कर सकता। जैसे कि कोई मनुष्य नाक से सुन नहीं सकता और आँख से चख नहीं सकता। यह नियम शरीर के लिए निश्चित है। पूर्व और पश्चिम के सभी देशों के सब मनुष्यों के लिए यही नियम है। 
ऐसे ही मानसिक नियम हैं कि जो कोई ईष्र्या, द्वेष, अहंकार, क्रोध, लोभ, परनिन्दा, प्रतिशोध की मानसिकता में जिएगा, उसे सुख-शाँति और कल्याण नसीब नहीं हो सकता। वह इसी हाल में मर गया तो वह मर कर भी कष्ट ही पाएगा। उसके बाद उसे दुनिया में बुरा भला कहा जाएगा।
इसके विपरीत जो कोई सत्य ज्ञान, दया, प्रेम, परोपकार, क्षमा, संयम, दुआ, सब्र और शुक्र की मानसिकता के साथ अच्छे काम करेगा, उसका कल्याण होगा। उसके मरने के बाद भी लोग उसे अच्छाई के साथ याद करेंगे और वह भी मर कर सुख शाँति ही पाएगा।
जो जिस मानसिकता के साथ जिएगा, वह उसी मानसिकता में मरेगा और जिस हाल में वह मरेगा, उसी के मुताबिक़ वह अपनी चेतना में सुख या दुख पाएगा। यह अटल नियम है। मनुष्य इनके अधीन है। इन नियमों का पालन करने का नाम है ‘आज्ञाकारी’ होना। आज्ञाकारी होने को अरबी में मुस्लिम कहते हैं।
जो आज्ञाकारी नहीं बनता, वह आज्ञा का, नियम का उल्लंघन करता है और कष्ट उठाता है। आज्ञा न मानना लोगों के कष्ट का मूल कारण है। नबियों ने, सत्पुरूषों ने कष्ट के निवारण के लिए लोगों को ईश्वर की इन्हीं आज्ञाओं और प्राकृतिक नियमों का ज्ञान कराया। 
वेद, बाइबिल और क़ुरआन में, सबमें ये मौलिक सत्य नियम मिल जाएंगे। वेद और बाइबिल इतिहास के लेखन से पहले रचे गए थे। वेद और बाइबिल में लोगों के बीच कार्य विभाजन, सम्पत्ति विभाजन, विवाह, शिक्षा, शासन और दण्ड व्यवस्था के बारे में जो नियम अब लिखे हुए मिलते हैं, उनका पालन करना आज किसी व्यक्ति और समाज के लिए सम्भव नहीं है। यह भी निश्चित नहीं है कि ये सभी नियम ऋषियों और नबियों ने ही बताए थे या उनके नाम से उनके बाद किसी और ने लिख दिए हैं क्योंकि वेद और बाइबिल आज अपने मौलिक स्वरूप में नहीं हैं और उनका बहुत हिस्सा खो गया है। वेद पहले ब्राह्मी लिपि में थे। आज उस लिपि को वेद के पण्डित पढ़ नहीं सकते। यही वजह है कि वेद और बाइबिल के नियमों का प्रचलन समाज में बन्द हो चुका है। ये ग्रन्थ आज किसी देश का संविधान नहीं हैं। 
पैग़म्बर मुहम्मद साहब सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सिखाया है कि सबको सम्मान दो और मेरा अनुकरण करो। इस तरह उन्होंने प्राचीन काल से चले आ रहे कल्याणकारी नियमों को उनके शुद्ध रूप में पूरी मानव जाति को एक बार फिर से उपलब्ध करा दिया है। जो भी निष्पक्ष होकर इस बात की जाँच करेगा, वह इसकी सत्यता को आसानी से पहचान लेगा। उनके उत्तम आदर्श के अनुरूप आप एक व्यक्ति और एक समाज के रूप में पूर्व और पश्चिम में, हर देश में समान रूप से आसानी से अमल कर सकते हैं। जिससे आपका तुरन्त कल्याण होगा। आपको शरीर, मन और आत्मा के स्तर पर तुरन्त उन्नति अनुभव होगी।
ऐसा करना है तो आपको होश में आना होगा। लोग आम तौर पर नफ़रत में अन्धे हैं या फिर ग़ाफ़िल हैं कि उन्हें मौत आएगी। आपको न्यूट्रल होकर अपने हित अहित का विचार करना होगा। मौत आपको आनी है। अपने कर्मों का फल भी आपको ही भोगना है। क्या आप जीवन में और मृत्यु के बाद अपने लिए कष्टों का चुनाव करना चाहेंगे या फिर सुख-शाँति का?
सुख का चुनाव करना चाहते हैं तो होश में आईये।
धर्म के परिमार्जन की ज़रूरत है। धर्म परिवर्तन की ज़रूरत नहीं है क्योंकि सबका धर्म पहले ही से एक है। वह है कल्याण के लिए एक अजन्मे परमेश्वर के नियमों का पालन करना।

Tuesday, August 22, 2017

Solution for Hindu Muslim Problem in India

भारत में मुसलमानों की समस्याएं और उनका हल
भारत में मुसलमानों के सामने कई तरह की समस्याएं हैं जो कि जीवन का हिस्सा हैं। जब तक जीवन है तब तक एक इन्सान को रोज़गार, इलाज, शादी, मकान, विकास और सुरक्षा के सम्बन्ध में कई तरह की चुनौतियाँ पेश आती हैं। ये चुनौतियाँ हरेक धर्म के आदमी को पेश आती हैं, इसलिए ये मुसलमानों को भी पेश आती हैं। ये चुनौतियाँ हरेक देश में पाई जाती हैं, इसलिए ये भारत में भी पाई जाती हैं। ऐसा नहीं हो सकता कि इस ज़मीन पर जीवन हो और जीवन में कोई चुनौती न हो। ऐसा भी नहीं हो सकता कि हरेक देश में चुनौतियाँ हों और भारत में किसी को या मुसलमानों को कोई चुनौती न हो। जीवन की प्रकृति को कोई बदल नहीं सकता। इन्सान की प्रकृति को भी कोई नहीं बदल सकता। भलाई और बुराई का चुनाव इन्सान की प्रकृति का हिस्सा है। एक इन्सान चाहे तो भलाई या बुराई, नफ़रत या मुहब्बत, शुक्र और नाशुक्री में से जिसे चाहे चुन सकता है। इन्सान को रब ने चुनाव के अधिकार के साथ पैदा किया है। यही वजह है कि हरेक इन्सान ख़ैर और शर के साथ आज़माया जाता है।
ज्ञानी लोगों ने हमेशा सबकी भलाई को चुना। उन्होंने सबकी भलाई में अपनी भलाई समझी। ज्ञानी को संस्कृत में पण्डित और अरबी में आलिम कहते हैं। यह एक गुण है। जिसमें ज्ञान या इल्म का गुण हो, उसे ज्ञानी या आलिम कहते हैं। ज्ञान एक श्रेष्ठ गुण है। जिसे जितना ज़्यादा ज्ञान होता है, उसे समाज में उतना ज़्यादा सम्मान मिलता है क्योंकि वह उस ज्ञान से समाज का सबसे ज़्यादा भला कर सकता है। जब किसी वंश में ज्ञान एक परम्परा के रूप आगे बढ़ने लगा तो फिर उनमें भी दो तरह के लोग हो गए। एक तरह के लोग तो अपने पूर्वजों की तरह सबकी भलाई में अपनी भलाई समझते थे लेकिन दूसरी तरह के लोग उनके खि़लाफ़ चलने लगे। वे सबके शोषण में अपनी ऐश देखने लगे। यह हर देश में हुआ और हर काल में हुआ। यह मक्का में भी हुआ और यही काशी में हुआ। यह चार हज़ार साल पहले भी हुआ और यही आज हो रहा है। ज्ञानी वर्ग की नीयत सही हो तो उनसे सही मार्गदर्शन पाकर हरेक इन्सान रोज़गार, इलाज, शादी, मकान, विकास और सुरक्षा के सम्बन्ध में पेश आने वाली चुनौतियों को हल कर सकता है लेकिन अगर ज्ञानी वर्ग की नीयत दूसरों के शोषण की हो जाए तो फिर आम लोगों का विकास नहीं बल्कि उनका विनाश होता है।
मेरी नज़र में सब समस्याएं तो जीवन की चुनौतियाँ हैं लेकिन वास्तव में जो सबसे बड़ी समस्या है, वह है ज्ञानी वर्ग की नीयत और उसके कर्म का बिगड़ जाना। ऐसे बिगड़े हुए ज्ञानी आपको हर ज़माने में और हर धर्म-मत में मिलेंगे। मुसलमानों में, हिन्दुओं में, सिखों में, ईसाईयों में और यहूदियों में सबमें ऐसे ज्ञानी मिलेंगे, जो धर्म के नाम पर शोषण करते हैं। ये ज्ञानी अपने समुदाय के लिए भी समस्या हैं और दूसरे समुदायों के लिए भी। बिगड़े हुए ज्ञानी अपनी कूटनीति से अपने समाज में सही नीयत और अच्छे कर्म वाले ज्ञानियों के मुक़ाबले ज़्यादा लोकप्रिय हो जाते हैं। ये लोगों में नफ़रत की भावना भड़काते हैं और उन्हें बदले के लिए उकसाते हैं। भावना में बहने के कारण लोग विवेक से काम लेना बन्द कर देते हैं। जिससे वे केवल भेड़ों की तरह उनके पीछे चलने के आदी हो जाते हैं। भीड़ जब भेड़ की तरह जीने लगती है, तब वह सोच विचार बन्द कर देती है। जिससे उसका विकास रूक जाता है। ऐसे में बिगड़े हुए ज्ञानी जुर्म को भी धर्म बता दें तो भीड़ उसे धर्म ही मानती है। जब बिगड़े हुए ज्ञानी अपने समाज में लोकप्रियता पा जाते हैं, तब वे प्रेम के बजाय नफ़रत और माफ़ी के बजाय इन्तेक़ाम की भावना लोगों के मन में भरते हैं। बार बार एक नफ़रत और इन्तेक़ाम का एक ही मैसेज मन में जाता है तो वह लोगों के अवचेतन मन का गहरा विश्वास बन जाता है। फिर लोग उस विश्वास के ग़ुलाम बन जाते हैं। उनकी भावनाएं बार बार भड़कती हैं और वे ज़रा ज़रा सी बात पर अपने ही जैसे लोगों को अपना दुश्मन समझकर उनसे लड़ते हैं।
जब ऐसा हो जाए, तब इस घातक माइन्ड प्रोग्रामिंग को बदलना ज़रूरी है। इसका एक तरीक़ा सबको जागरूक बनाना है। यह एक मुश्किल तरीक़ा है क्योंकि आम तौर से लोग अपने विश्वासों की जाँच करने के लिए तैयार नहीं होते। इसमें बुनियादी तौर पर लोगों को इन्सान के मन और प्रकृति के नियमों की सही जानकारी देकर यह सिखाया जाता है कि
1. कोई भी फ़ैसला लेने से पहले भलाई बुराई का विचार ज़रूर कर लिया जाए। जिस काम से सबका हित हो या किसी का अहित न हो, उस काम को अच्छे तरीक़े से किया जाए।
2. सबकी भलाई के मैसेज को सबके सामने बार बार दोहराया जाए ताकि वह जन गण मन का विश्वास बन जाए क्योंकि विश्वास के सही होने का असर व्यवहार पर ख़ुद ही पड़ता है।
हज़ारों साल पहले नबी नूह और इबराहीम अलै. ने यह किया और सबकी भलाई के लिए जो कुछ ज़रूरी था, वह सब किया। आज भी उनका नमूना हमें राह दिखाता है। मुसलमान, हिन्दू, यहूदी और ईसाई सबकी किताबों में इनका नाम बड़े आदर से लिया जाता है। ईसाई नूह को नोह और हिन्दू न्यूह व मनु कहते हैं। ईसाई इबराहीम को अब्राहम और हिन्दू ब्रह्मा कहते हैं। अब्राहम और ब्रह्मा नाम अंग्रेज़ी में लिखें जाएं तो इन में समानता और ज़्यादा प्रकट हो जाती है। केवल एक अक्षर ‘ए’ आगे से पीछे होता है और अलग अलग नामों के पीछे छिपी एक ही शख़्सियत सामने आ जाती है। जो आज भी मुस्लिम, हिन्दू, यहूदी और ईसाई, सबके लिए एकता का मज़बूत आधार है।
हिन्दू साहित्य में ईश्वर का एक सगुण नाम ब्रह्मा है। ईश्वर के इस पवित्र नाम पर कई ऋषियों के नाम हुए हैं। उन कई ऋषियों में से यह ब्रह्मा वह हैं जिनका निवास नाभिकमल पर बने तीर्थराज आदिपुष्कर में बताया जाता है। वैदिक इतिहास में इनकी एक और पहचान यह आई है कि वसिष्ठ से लड़ने के बाद  विश्वामित्र तपस्या करने के लिए इन्हीं ब्रह्मा जी के पास आदि पुष्कर आए थे। इन्हीं के निर्देशन में साधना करने पर विश्वामित्र को गायत्री छन्द का ज्ञान हुआ। यह प्रथम काव्य था। गायत्री छन्द के रूप में वेद का का ज्ञान लेकर विश्वामित्र वसिष्ठ के पास आए तो वसिष्ठ ने उन्हें ब्रह्मर्षि की मान्यता दे दी।


      आप विश्व का मानचित्र फैलाकर देख सकते हैं कि पृथ्वी के केन्द्र में प्राचीन तीर्थ मक्का स्थित है। इबराहीम यहीं रहते थे। तब मक्का में केवल एक ईश्वर को ही ईष्ट और इलाह माना जाता था। उसी से दुआ प्रार्थना की जाती थी। इस केन्द्र से यही ज्ञान हर तरफ़ फैलता था। यह ज्ञान भारत में भी आया। आज भी वेद और उपनिषदों के बहुत से मन्त्रों में यह ज्ञान मौजूद है। बाइबिल और क़ुरआन में इसी एक ज्ञान को बिल्कुल साफ़ देखा जा सकता है।
सभी सत्य ज्ञान का स्रोत एक ईश्वर को मानते हैं। सबके पास ईश्वर के प्रेम, समर्पण, क्षमा, दया, परोपकार और सन्मार्ग के सम्बन्ध में साफ़ आदेश मौजूद हैं। जिन्हें सब मिलकर मानते तो सब जीवन का आनन्द आसानी से ले रहे होते। ऐसा नहीं हो पाया क्योंकि धर्म के ग्रन्थों की व्याख्या ज्ञानी करते हैं और ज्ञानियों में दोनों तरह की मानसिकता के लोग मौजूद हैं। एक सच्चे और दूसरे पाखण्डी। एक न्यायकारी और दूसरे अन्याय करने वाले। एक सेवक और दूसरे शोषक। एक इन्सान और दूसरे शैतान। एक प्रेम अमृत बरसाने वाले और दूसरे नफ़रत की आग भड़काने वाले।
    करबला का वाक़या मशहूर है। जिसमें यज़ीद के फ़ौजियों ने इमाम हुसैन र. को और उनके घर वालों को क़त्ल कर दिया था। इन क़ातिलों में ज्ञानी भी थे बल्कि कुछ तो उनके रिश्तेदार थे।
ईसा मसीह पर क़ातिलाना हमला करने वाले भी ज्ञानी थे।
राम-रावण युद्ध भी मशहूर है। रावण भी बहुत बड़ा ज्ञानी था।
महाभारत का युद्ध भी मशहूर है। वह भी एक ही संस्कृति के लोगों बल्कि एक ही परिवार के सदस्यों के बीच हुआ।  ये सभी मशहूर वाक़ये हैं। इनमें आप दोनों प्रवृत्तियों को आसानी से पहचान सकते हैं। संस्कृति एक होने के बावजूद दो प्रवृत्तियाँ हमेशा से रही हैं और आज भी हैं। सबकी संस्कृति एक होने से लोगों में प्रेम और शाँति हुआ करती तो वाक़या करबला न होता, न राम-रावण युद्ध होता और न महाभारत होता।
जब एक संस्कृति के दो लोग आपस में टकराते हैं तो उस समाज के लोगों के लिए यह पहचानना थोड़ा आसान होता है कि कौन शैतान या रावण पक्ष कौन है?
...लेकिन जब यह टकराव दो संस्कृतियों के बीच होता है तो किसी भी संस्कृति के आम लोग यह नहीं मानते कि शैतान या रावण पक्ष उनकी संस्कृति वाला है। यह एक पेचीदा मनोवैज्ञानिक मसला है। इसे मुसलमानों को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए क्योंकि यह लेख मुसलमानों को उनकी समस्याओं का हल देने के लिए लिखा जा रहा है और जो कुछ करना है, अपने लिए उन्हें ख़ुद ही करना है।
मुसलमान हिन्दुओं के दुश्मन नहीं हैं और वे उनका बुरा नहीं चाहते। जितना हो सकता है, मुसलमान उनके साथ भलाई का बर्ताव करते हैं। यह बात मुसलमान जानते हैं क्योंकि वे अपने दिल की हालत तो जानते ही हैं। इस बात को आम हिन्दू भी जानते हैं। ठीक ऐसे ही आप देख सकते हैं कि भारत के हिन्दू मुसलमानों के दुश्मन नहीं हैं और वे उनका बुरा नहीं चाहते। जितना हो सकता है, हिन्दू भी मुसलमानों के साथ भलाई का बर्ताव करते हैं। स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, स्टेडियम, मज़ार, मन्दिर, गाँव और शहर; हर जगह आप हिन्दू मुस्लिम एकता को देख सकते हैं। हम सब एक हैं। यह एक सच्चाई है। इसी के साथ यह भी सच है कि मुसलमानों और हिन्दुओं के बीच कुछ शैतान और रावण भी हैं। जिन्हें यह एकता सहन नहीं होती। अपने राजनैतिक क़ब्ज़े के लिए ये दोनों में नफ़रत भड़काते हैं। एक को दूसरे से डराते हैं। एक को दूसरे पर हमले के लिए उकसाते हैं। आम लोग इस शैतान और रावण को अपनी संस्कृति का समझकर अपना शुभचिन्तक समझ लेते हैं। यह आम लोगों की भूल है। मुसलमान यह भूल न करें।

(...जारी)

Friday, June 30, 2017

शैतान के हमलों से बचने के लिए तक़्वा (संयम) ज़रूरी क्यों है? Taqwa

शैतान को उसके कामों से पहचानना शुरू करेंगे तो आपको मुसलमानों में लीडर बने हुए शैतान मिल जाएंगे। मुसलमानों को आपस में लड़ाते हुए मिल जाएंगे और जिस दुश्मन से आप दुखी हैं, उसके साथ खड़े हुए सत्ता सुख भोगते हुए भी मिल जाएंगे। शैतान का मतलब है सरकश। सरकश लोग सरकश होते हैं, ये किसी धर्म के नहीं होते। इनका दीन धर्म दूसरों पर हुकूमत करना और उनका शोषण करना होता है। इसके लिए ये सोशल इन्जीनियरिंग करते हैं। ख़ुद को सबसे ऊपर रखते हैं। एक समाज के दो बनाते हैं। दोनों को आपस में लड़ाते हैं। ख़ून जब भी बहता है किसी आदमी का बहता है, कोई औरत विधवा होती है और कहीं बच्चे अनाथ होते हैं। दोनों तरफ़ विधवा, अनाथ और डरे हुए लोग वुजूद में आ जाते हैं। डरे हुए लोगों पर हुकूमत चलाना आसान होता है। जो भी समाज में डर फैलाए, अतीत की बातें याद दिलाकर नफ़रत फैलाए, ख़ून बहाए, वह शैतान है। शैतान का रूप सिर्फ़ वही नहीं है, जिसके सिर पर आप विज्ञापन में सींग देखते हैं। आपको इन्सान के रूप में शैतान देखने को मिलेंगे। ये कभी टोपी लगा लेते हैं, कभी बुकऱ्ा पहन लेते हैं, कभी शलवार क़मीस पहन लेंगे, कभी तिलक लगा लेंगे। ये दीन के पीर और धर्म के गुरू होने का आडम्बर भी कर लेंगे लेकिन इन्हें आप इनके काम से ज़रूर पहचान लेंगे। आप इनके प्रशिक्षित चेलों की शिकायत इनसे ही करेंगे तो क्या आप जीवन में शांति और सुरक्षा पा लेंगे?
शैतान आपको शांति और सुरक्षा क्यों देगा? वह अपनी हुकूमत का आधार ही ख़त्म क्यों करेगा? शांति और सुरक्षा के लिए आपको समाज के सज्जन लोगों के साथ मिलकर अपने आस पास प्रेम के विचार फैलाने होंगे। आपको लोगों में जागरूकता लानी होगी। इसके लिए आपको विचार और भावना पर क़ाबू करना सिखाना होगा। जब तक लोग तक़रीर सुनकर नफ़रत से बेक़ाबू होते रहेंगे, हर देश में लोग आपस में एक दूसरे को मारते रहेंगे और शैतान अपने ग़ुलामों पर राज करते रहेंगे। ईमान वालों का यही काम है कि वे इन्सानों को शैतानों की ग़ुलामी से आज़ाद होने का तरीक़ा बताएं।

आप ख़ुद को चेक कर सकते हैं कि आप दूसरों से प्यार करते हैं या नफ़रत? आप कितनी जल्दी ग़ुस्से में आ जाते हैं? किसी ने आपके साथ बुरा किया है तो आपने उसे दिल से माफ़ कर दिया है या फिर उस ज़ख़्म को आज भी याद रखे हुए हैं? अगर आप नफ़रत, ग़ुस्सा, जलन और मायूसी से अपना दिल बचा नहीं सकते तो आप शैतान के आसान शिकार हैं।
शैतान उन लोगों पर हुकूमत करता है जो कि अपने विचार और अपनी भावना के ग़ुलाम हैं। वह लोगों के दिलों में ग़लत विचार (वसवसे) डालता है और फिर ग़लत भावना ख़ुद पैदा होती है और उसकी प्रेरणा से ग़लत काम ख़ुद होता है। आपको लोगों को संयम (तक़्वा) सिखाना होगा। ऐसे ही लोग शैतान से बच सकते हैं। आपको ऐसे लोगों को साथ लेकर संयमी, तक़्वा वाले लोगों की तादाद समाज में बढ़ानी होगी। ऐसे लोग अपने दुश्मन शैतान को पहचानते जाएंगे और उन्हें अपना लीडर बनाने से बचते जाएंगे। यह धीरज के साथ लम्बे समय तक किया जाने वाला काम है। ऐसे लोग राजनीति करें, तब लोगों को न्याय, शांति और सुरक्षा मिलेगी। तब सबका विकास होगा, कल्याण होगा, जो कि लोग चाहते हैं।
अक्सर लोग चाहते हैं कि जल्दी से कुछ हो जाए। जल्दी से तो केवल आपको बहलावा ही मिल सकता है और बहलावा भी वही शैतान देगा, जिसके हमलों के आप शिकार हैं।